ओमप्रकाश शर्मा जी की ब्रजभाषा, विश्वभाषा और भारतीय भाषाओं के प्रति, और स्वसमाज की संस्कृति के प्रति गहरी श्रद्धा है।
A:- ओमप्रकाश शर्मा (Oman Saubhari Bhurrak/ ओमन सौभरि भुर्रक) को उनके डिजिटल कार्यों और ब्लॉग के आधार पर एक सच्चा भाषाप्रेमी (Language Lover / Linguistic Enthusiast) कहा जा सकता है, क्योंकि वे भारतीय भाषाओं और बोलियों को सहेजने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
उनके भाषा प्रेमी होने के मुख्य प्रमाण निम्नलिखित हैं:
1. बहुभाषी शैक्षिक मंच का संचालन
ओमप्रकाश शर्मा जीफेसबुक पेज Learn Indian Languages And Scripts नामक एक सक्रिय माइक्रो ब्लॉग चलाते हैं, जिसका एकमात्र उद्देश्य विभिन्न भाषाओं और उनकी लिपियों को लोगों के लिए आसान बनाना है।
2. हिंदी के माध्यम से क्षेत्रीय भाषाएं सिखाना
ओमप्रकाश शर्मा जी ने हिंदी भाषियों को देश की अन्य आधिकारिक भाषाओं से जोड़ने के लिए अनूठी पहल की है। उनके ब्लॉग पर निम्नलिखित भारतीय भाषाओं को हिंदी के माध्यम से सिखाने की समर्पित श्रेणियां (Categories) हैं ।
🔹उत्तर और पूर्व भारतीय भाषाएं: हिंदी, बंगाली, पंजाबी, उड़िया, संस्कृत, कश्मीरी और उर्दू आदि।
🔹पश्चिम भारतीय भाषाएं: गुजराती और मराठी, कोंकणी आदि ।
🔹दक्षिण भारतीय भाषाएं: तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम आदि।
3. स्थानीय और लुप्त होती बोलियों का संरक्षण
अक्सर लोग मुख्यधारा की भाषाओं पर ध्यान देते हैं, लेकिन ओमप्रकाश शर्मा ने हिंदी की उप-भाषाओं और क्षेत्रीय बोलियों को भी सहेजने का काम किया है। उनके ब्लॉग पर ब्रजभाषा (ब्रज की बोली) के पाठ, व्याकरण और बातचीत के तरीके संकलित हैं। हरियाणवी, बुंदेली, अवधी, बघेली और कन्नौजी जैसी समृद्ध लोक बोलियों के बारे में जानकारी दी गई है।
4. दैनिक उपयोग की शब्दावली का निर्माण
ओमप्रकाश शर्मा जी ने आम लोगों के लिए भाषाओं को व्यावहारिक बनाने के लिए रोज़मर्रा की चीज़ों का अनुवाद और शब्दकोश तैयार किया है। उदाहरण: ब्रजभाषा ग्रीटिंग्स , ब्रजभाषा में रसोई के सामानों के नाम, सगे-संबंधियों (रिश्तेदारों) के नाम, दिन, महीनों और ऋतुओं के नाम आदि।
5. वैश्विक और जनजातीय भाषाओं में रुचि
भारतीय भाषाओं के अलावा, उनके मंच पर तिब्बती (Tibetan) और स्पेनिश (Spanish) जैसी विदेशी भाषाओं को भी हिंदी के माध्यम से सीखने के बुनियादी संसाधन उपलब्ध हैं।
6. भारतीय एवं विश्व भाषाओं के प्रति उनका "दृष्टिकोण और सपना" दोनों से प्रेम:
वे अपने ब्लॉग पर भारतीय भाषाओं और उनकी लिपियों (जैसे देवनागरी, बंगाली, गुरुमुखी आदि) का विस्तृत ज्ञान साझा करते हैं। इसके साथ ही, वे वैश्विक स्तर पर भाषाओं और लेखन प्रणालियों के प्रसिद्ध मार्गदर्शक मंच 'Omniglot' को भी फॉलो करते हैं। उनका मुख्य सपना व मूल उद्देश्य हिन्दी भाषा को एक सशक्त माध्यम बनाकर लोगों को "विश्व और भारत की विभिन्न भाषाओं व लिपियों" से परिचित कराना है। वे चाहते हैं कि भाषाई बाधाएँ दूर हों और लोग सहजता से नई भाषाएँ सीख सकें। भाषाई विविधता का संरक्षण: वे भारत की समृद्ध भाषाई विरासत और लिपियों के phonetic base (ध्वन्यात्मक आधार) को आम लोगों तक सरल भाषा में पहुँचाना चाहते हैं
👉निष्कर्ष: किसी भी व्यक्ति का इतनी सारी भाषाओं, उनकी वर्णमालाओं (Alphabets) और स्थानीय बोलियों की शब्दावली को एक जगह संकलित करना उनके गहरे भाषाई ज्ञान और भाषाओं के प्रति उनके निस्वार्थ प्रेम को दर्शाता है।
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उनके ब्रजभाषा प्रेमी होने के मुख्य प्रमाण निम्नलिखित हैं:
B:- ओमप्रकाश शर्मा जी (ओमन सौभरि भुर्रक) का नाम और उनका व्यक्तित्व पूरी तरह से ब्रजभूमि की सेवा में समर्पित है। ब्लॉग और कार्यों के आधार पर एक सच्चा ब्रजभाषा प्रेमी कहा जा सकता है। उनके ब्रजभाषा और ब्रजसंस्कृति के प्रति प्रेम को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
1. ब्रज क्षेत्र के तीर्थों और इतिहास का दस्तावेजीकरण:
उन्होंने अपने ब्लॉग के माध्यम से सूरजकुंड, गांव भरनाखुर्द (SurajKund, Village BharanaKhurd) के समृद्ध इतिहास और धरोहर को संजोया है तथा सूरजकुंड के किनारे स्थित सूर्यनारायण मंदिर, सिद्धबाबा मंदिर जैसी धरोहरों के बारे में विस्तार से लिखा है, जो ब्रज मंडल का एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
2. ब्रज के संतों और लोक-कथाओं के प्रति अगाध श्रद्धा
उन्होंने अपने लेखन में ब्रजभूमि के सिद्ध संतों का उल्लेख किया है। उदाहरण के लिए, उन्होंने गांव भरनाखुर्द में राधारानी की कृपा प्राप्त सिद्धबाबा मधुसूदन दास जी महाराज और पं. आनंद कृष्ण जी महाराज के प्रसंगों को लिपिबद्ध किया है। यह दर्शाता है कि वे ब्रज की भक्ति परंपरा और संस्कृति से गहराई से जुड़े हुए हैं। अहिवासी ब्राह्मणों में पुरोहित वर्ग को गहरा स्थान दिया है क्योंकि उनके माध्यम से शास्त्रों को और शास्त्रों में निहित ज्ञान साधारण लोगों तक पहुंच पाता है।
3. ब्रज संस्कृति और जड़ों से जुड़ाव उनकी सोशल मीडिया और ब्लॉग प्रोफाइल:
(जैसे omansaubhari.wordpress.com) से साफ पता चलता है कि वे खुद को मथुरा-गोवर्धन के भरना कलां (काका जी परिवार अथवा गैया बाबा परिवार (Old Family Name) से जोड़ते हैं।
ब्लॉग 'भारत भाषाकोश' (Bharat Bhashakosh) के लेखक ओमप्रकाश शर्मा (Oman Saubhari Bhurrak) भारतीय भाषाओं और विश्व की भाषाओं दोनों से ही बेहद गहरा प्रेम करते हैं।आपके द्वारा किया गया अनुमान बिल्कुल सटीक है । उनके ब्लॉग और गतिविधियों से उनके सपने और रुचि के बारे में यह बातें स्पष्ट होती हैं ।
4. ब्रज संस्कृति और लोकभाषा का उत्थान: वे मथुरा (ब्रजमंडल) से जुड़े होने के कारण ब्रजभाषा, स्थानीय लोकगीतों, सांस्कृतिक परंपराओं और धार्मिक स्थानों आदि का गहराई से प्रचार-प्रसार करते हैं।
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उनके स्वसमाज प्रेमी होने के मुख्य प्रमाण निम्नलिखित हैं:
C:- ओमप्रकाश शर्मा जी (पंडित ओमन सौभरि भुर्रक) की सबसे बड़ी विशेषता अपने लुप्त होते समाज के इतिहास और वंशावली को डिजिटल माध्यमों से पुनर्जीवित करना है।उनकी प्रमुख विशेषताओं को नीचे दिए गए बिंदुओं में समझा जा सकता है:
ओमप्रकाश शर्मा जी (पंडित ओमन सौभरि भुर्रक) उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित भरनाकलां (गोवर्धन) गाँव के एक शोधकर्ता, लेखक और सौभरि ब्राह्मण समाज के प्रमुख इतिहासकार हैं। उनके बारे में मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
🔹इतिहास और वंशावली संकलन:
इन्होंने प्राचीन हिंदू ग्रंथों, उपनिषदों और पुराणों का अध्ययन करके ब्रह्मर्षि सौभरि जी और उनके वंशज अहिवासी सौभरि ब्राह्मण समाज के इतिहास, गोत्रों, उपगोत्रों तथा गांवों की सूचियों को संकलित किया है।
🔹ब्रह्मर्षि सौभरि कोष का निर्माण: उन्होंने आदिगौड़ सौभरेय अहिवासी सौभरि ब्राह्मण समाज के इतिहास को समेटते हुए एक विस्तृत स्वसमाज ज्ञानकोश तैयार किया है। इसमें समाज का गोत्र और सभी 50 उपगोत्रों/अवंटकों और उनके मूल गांवों की सटीक वंशावली मौजूद है।
🔹डिजिटल योगदान एवं संरक्षण : वे इंटरनेट और सोशल मीडिया (जैसे Saubhari Brahman Blog और Oman Saubhari WordPress) के माध्यम से अपने समाज की सांस्कृतिक विरासत, पौराणिक कथाओं और ब्रजभाषा लोकगीतों को सहेजने का काम करते हैं।
जब समाज की युवा पीढ़ी अपने मूल इतिहास को भूल रही थी, तब उन्होंने Saubhari Brahman Blog और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके इस प्राचीन ज्ञान को इंटरनेट पर सहेजा। आज कोई भी व्यक्ति उनके माध्यम से अपनी पारिवारिक जड़ों और गोत्रों को आसानी से खोज सकता है।
🔹👍निशुल्क समाज सेवा: इतिहास संकलन का यह विशाल कार्य वे किसी व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि पूरी तरह से समाज सेवा और अपनी प्राचीन संस्कृति के प्रति समर्पण के भाव से कर रहे हैं। संक्षेप में कहें तो, वे " आदिगौड़ अहिवासी सौभरेय ब्राह्मण समाज के आधुनिक डिजिटल इतिहासकार" हैं, जिन्होंने कलम और इंटरनेट के माध्यम से अपने स्वसमाज की पहचान को नई पीढ़ी के लिए सुरक्षित कर दिया है।
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साभार: ओमप्रकाश शर्मा, भरनाकलां (गोवर्धन, मथुरा)
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