Monday, 16 February 2026

ब्रह्मर्षि सौभरि वंशजों (अहिवासी ब्राह्मणों) के १२ गांवों में होली पर आयोजित होने वाले मेलों की तिथियां

 ब्रह्मर्षि सौभरि वंशजों (अहिवासी ब्राह्मणों) के १२ गांवों में होली पर आयोजित होने वाले मेलों का विवरण:-

विश्व के अन्य सभी देशों की तुलना में “भारत” वास्तव में आज भी गांवों का ही देश है। कला, संस्कृति, वेशभूषा के आधार पर आज भी ‘गांव’ देश की रीढ़ की हड्डी बने हुये हैं। प्रत्येक गांव का एक अपना ही महत्व होता है जिसका पता वहां रहने वाला ही जानता है। गांव में चक्की (चाखी) के मधुरगीत से ही सवेरा आरंभ होता है।

होली पर इन मेलों में रंग-गुलाल, लोक संगीत, ढोल-नगाड़े, पारंपरिक व्यंजनों और अनूठी क्षेत्रीय परंपराओं के साथ उमंग भरा माहौल होता है, जो सामुदायिक एकता व उल्लास को दर्शाता है ।

 मेलों/त्योहारों की तिथियां:- होली का त्योहार भारतीय उपमहाद्वीप की विभिन्न हिंदू परंपराओं में सांस्कृतिक महत्व रखता है। यह अतीत की गलतियों को भुलाकर उनसे मुक्ति पाने, दूसरों से मिलकर संघर्षों को समाप्त करने और भूलकर क्षमा करने का उत्सव है। लोग ऋण चुकाते हैं या क्षमा करते हैं, साथ ही अपने जीवन में नए सिरे से संबंध स्थापित करते हैं। 

होली वसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक है, जो लोगों को बदलते मौसम का आनंद लेने और नए मित्र बनाने का अवसर प्रदान करती है। होली का ब्रज क्षेत्र में विशेष महत्व है , जिसमें राधा कृष्ण से जुड़े पारंपरिक स्थान शामिल हैं : मथुरा , वृंदावन , नंदगाँव , बरसाना और गोकुल, दाऊजी , गोवर्धन आदि। होली के दौरान ये सभी स्थान लोकप्रिय पर्यटन स्थल हैं।

हिंदू पंचांग चंद्र-सौर है, लेकिन अधिकांश त्योहारों की तिथियां चंद्र पंचांग के भाग के अनुसार निर्धारित की जाती हैं। चंद्र दिवस को तीन विशिष्ट पंचांग तत्वों द्वारा पहचाना जाता है वो हैं मास, पक्ष और तिथि।



१:बिजवारी- फाल्गुन शुक्ल षष्ठी (छठ)

२:नगरिया - फाल्गुन शुक्ल द्वादशी 

३:खानपुर - फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी (चौदस)

४:डाहरौली - फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी (चौदस)

५:भरनाकलां - चैत्र कृष्ण प्रथमा (परवा)

६:भदावल - चैत्र कृष्ण प्रथमा ((परवा)

७:भरनाखुर्द -चैत्र कृष्ण द्वितीया (दियोज)

८:मघेरा - चैत्र कृष्ण द्वितीया (दियोज)

९:पलसौं- चैत्र कृष्ण तृतीया (तीज़)

१०: पेलखू - चैत्र कृष्ण तृतीया (तीज़)

११:सीह - चैत्र कृष्ण चतुर्थी (चौथ)

१२:खायरा - चैत्र कृष्ण पंचमी (पाँचें/रंगपंचमी


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